राशन दुकानों के बाहर सजती है दलालों की दुकान, 20 से 28 रुपये में खरीदकर गोदामों में डंप हो रहा गरीबों का निवाला; इस साल कितनी हुई कार्रवाई, सवाल पर चुप है खाद्य विभाग!

धमतरी/जिले में इन दिनों जनवितरण प्रणाली यानी PDS के चावल का अवैध धंधा पूरी रफ्तार से फल-फूल रहा है। जिस राशन को सरकार गरीबों की थाली सजाने के लिए 1 रुपये किलो और मध्यम वर्ग के लिए 10 रुपये किलो में दे रही है, वही चावल राशन दुकान की चौखट लांघते ही दलालों की जेबें गर्म कर रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि राशन दुकानों के ठीक इर्द-गिर्द दलाल अपनी गुमटियां सजाकर खुलेआम बैठे हैं, लेकिन खाद्य विभाग की नजरें इस पूरे खेल पर रहस्यमयी तरीके से बंद हैं। आखिर धमतरी में PDS चावल पर कब और कहां कार्रवाई होती है? इस साल खाद्य अधिकारियों ने कितनों पर नकेल कसी और कितनों को जेल भेजा? इन सवालों का जवाब देने वाला कोई नहीं है।
गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों के पेट की आग बुझाने की योजना अब बिचौलियों के लिए मुनाफा कमाने की मशीन बन चुकी है। धमतरी जिले के रिसाइपरा और बासपारा जैसे मोहल्लों से लेकर शहर के कोने-कोने तक इस अवैध कारोबार की जड़ें गहराई तक फैल चुकी हैं। ‘मन से मोहन’ और ‘धन से रजत’ से भी ज्यादा चमक बिखेरने वाले रसूखदार लोग इस पूरे सिंडिकेट को चला रहे हैं। तंत्र की छत्रछाया ऐसी है कि ऊपर से लेकर नीचे तक अधिकांश लोग इसके बहते लाभ से दूर नहीं हैं।
काम करने का तरीका बेहद आसान और बेखौफ है। गरीब तबके के लोग अपनी आर्थिक तंगी या दूसरे किस्म का अनाज खरीदने की मजबूरी में इस PDS चावल को दलालों और कोचियों के हाथों 20 से 28 रुपये प्रति किलो के भाव बेच देते हैं।
राशन दुकानों के पास छोटी-मोटी गुमटियां लगाकर बैठे ये दलाल चंद मिनटों में चावल समेट लेते हैं। बात सिर्फ गुमटियों तक सीमित नहीं है; कई दलालों ने तो बाकायदा अपने घरों और गुप्त स्थानों पर बड़े-बड़े गोदाम बना रखे हैं, जहां रोज कुंटलों सरकारी चावल डंप किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहा है। क्या खाद्य विभाग को राशन दुकानों के बाहर बैठे इन कोचियों की भनक नहीं है? या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं? इस पूरे वर्ष में धमतरी जिले में अवैध चावल के इस खेल पर क्या कार्रवाई हुई और कितनों को सलाखों के पीछे भेजा गया, इसका कोई ठोस आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया जाता। कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है और मुख्य सरगना हमेशा साफ बच निकलते हैं।
योजना का उद्देश्य गरीबों को राहत पहुंचाना था, लेकिन धमतरी में यह योजना दलालों के वारे-न्यारे कर रही है। अब सवाल सीधा जिला प्रशासन और शासन से है—क्या गरीबों के हक पर डाका डालने वाले इन दलालों और उनके गोदामों पर बुलडोजर और कानूनी हथौड़ा चलेगा, या फिर PDS चावल का यह अवैध कारोबार यूं ही धड़ल्ले से फलता-फूलता रहेगा?
