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जिले में ‘अंधेरा’ कायम है सुशासन तिहार के बीच बिजली विभाग की खुली पोल!

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एक तरफ छत्तीसगढ़ सरकार ‘सुशासन तिहार’ मना रही है, सुशासन के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन धमतरी जिले से जो तस्वीरें और खबरें आ रही हैं, वे इन दावों को मुंह चिढ़ा रही हैं। 

धमतरीं/एक तरफ छत्तीसगढ़ सरकार ‘सुशासन तिहार’ मना रही है, सुशासन के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन धमतरी जिले से जो तस्वीरें और खबरें आ रही हैं, वे इन दावों को मुंह चिढ़ा रही हैं। धमतरी में बिजली विभाग अपनी ही धुन में मस्त है, जबकि जनता त्रस्त है। क्या यही है सुशासन? जहाँ आधी रात तक लोग पसीने से तर-बतर अंधेरे में बैठने को मजबूर हैं?

धमतरी जिले में बिजली विभाग की विफलता अब जगजाहिर हो चुकी है। गर्मी का पारा चढ़ते ही विभाग के दावों की हवा निकल गई है। आए दिन आधी रात तक बिजली गुल रहना अब यहाँ की नियति बन चुकी है। सबसे बड़ा सवाल उन करोड़ों रुपयों पर खड़ा होता है जो केंद्र और राज्य शासन से ‘मेंटेनेंस’ के नाम पर लिए जाते हैं।

गर्मी आने से पहले तैयारियों का दावा करने वाला विभाग अब ‘फॉल्ट’ के नाम पर पल्ला झाड़ रहा है।

ताज्जुब की बात है कि विभाग का सिस्टम अक्सर रात में ही जवाब दे जाता है, जिससे नन्हे बच्चे और बुजुर्ग पूरी रात सो नहीं पाते।

जनता की शिकायत सुनने के लिए बनाए गए हेल्पलाइन नंबर महज दिखावा साबित हो रहे हैं। धमतरी के निवासियों का आरोप है कि जब भी बिजली दफ्तर फोन किया जाता है, या तो नंबर ‘बिजी’ आता है या कर्मचारी रिसीवर उठाकर किनारे रख देते हैं।

“अगर आप हमारी बात सुन नहीं सकते, सुधार कर नहीं सकते, तो करोड़ों का फंड और बड़े-बड़े पद किस काम के?”

क्या धमतरी बिजली विभाग भ्रष्टाचार के दलदल में डूब चुका है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि बजट खर्च होने के बावजूद बुनियादी ढांचा इतना कमजोर क्यों है? आए दिन ट्रांसफार्मर का उड़ना और तारों का टूटना यह संकेत देता है कि धरातल पर काम नहीं, सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं।

एक तरफ उत्सव का माहौल है, दूसरी तरफ धमतरी की जनता बिजली कटौती के कारण सड़कों पर उतरने को मजबूर है। सुशासन का ढोल पीटने से पहले सरकार को बिजली विभाग के इन ‘बेलगाम’ अधिकारियों पर नकेल कसने की जरूरत है। अगर विभाग समय रहते नहीं जागा, तो यह आक्रोश आने वाले समय में एक बड़े जनांदोलन का रूप ले सकता है।

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