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मध्यान्ह भोजन कर्मचारियों का 2000 मासिक जीवन यापन के लिए क्या है पर्याप्त?

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मात्र ₹2000 में जीवन यापन को मजबूर मध्यान्ह भोजन रसोइया: मानदेय बढ़ोतरी की मांग 

धमतरीं/छत्तीसगढ़ राज्य के प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में वर्ष 1996 से अपनी सेवाएं दे रहे मध्यान्ह भोजन रसोइयों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। मात्र ₹2000 मासिक मानदेय में कार्य कर रहे ये रसोइये न केवल बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने का उत्तरदायित्व निभा रहे हैं, बल्कि विद्यालयी व्यवस्थाओं का भी एक अहम हिस्सा हैं।

इस अल्प मानदेय में वे अपने परिवार का दो वक्त का भोजन तक नहीं जुटा पा रहे हैं। विडंबना यह है कि सरकार की तरफ से बार-बार मानदेय बढ़ाने के आश्वासन दिए गए, परंतु धरातल पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। हाल ही में चुनाव पूर्व “मोदी की गारंटी” के तहत 50 प्रतिशत मानदेय वृद्धि का वादा भी किया गया था, लेकिन अब वह भी अनसुना होता दिख रहा है।

छत्तीसगढ़ संयुक्त शिक्षक संघ की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती ममता खालसा  ने सरकार से मांग की है कि मध्यान्ह भोजन रसोइयों के मानदेय में शीघ्र ही बढ़ोतरी की जाए। उन्होंने कहा कि इन रसोइयों को क्रम से ₹5000 मासिक मानदेय देने का आदेश जल्द जारी किया जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें।

यह मांग न केवल न्यायोचित है, बल्कि इन मेहनतकश महिलाओं की गरिमा और अधिकारों की रक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।

सरकार से अपील है कि इस महत्वपूर्ण वर्ग की अनदेखी न करते हुए जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएं।

    ममता खालसा 

प्रदेश अध्यक्ष ( महिला प्रकोष्ठ)

छ ग़ सयुक्त शिक्षक संघ

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