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मकई चौक पर फिर ‘थमा’ वक्त,महापौर का ‘इनाम’ भी नहीं आया काम, लाखों खर्च के बाद भी ‘घड़ी’ बनी शो-पीस!

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इस घड़ी को बनाने वाले को ईनाम देने की हुई थी घोषणा, फिर भी नहीं चली घड़ी, जनता पूछ रही सवाल- क्या पानी में गया हमारा पैसा?

धमतरीं/”कहते हैं वक्त किसी के लिए नहीं रुकता, लेकिन धमतरी नगर निगम के राज में वक्त भी ‘ठहर’ जाता है। शहर का दिल कहे जाने वाले मकई चौक की बहुचर्चित घड़ी एक बार फिर बंद पड़ गई है। यह वही घड़ी है जिसे चालू करवाने के लिए महापौर ने बाकायदा ‘इनाम’ की घोषणा की थी और इसे ठीक करने वाले को ढूंढकर लाया गया था। लेकिन कुछ ही दिनों की ‘टिक-टिक’ के बाद यह घड़ी फिर से खामोश हो गई है। अब सवाल यह है कि आखिर जनता के पैसों की इस बर्बादी का जिम्मेदार कौन है? 

“धमतरी के मकई चौक पर लगी यह विशालकाय घड़ी अब समय नहीं बताती, बल्कि निगम की लाचारी बताती है। देखिए, इसकी सुइयां कैसे एक ही जगह पर जाम हो गई हैं। लाखों रुपये खर्च करके और बड़े-बड़े दावों के साथ इसे शहर की शोभा बढ़ाने के लिए लगाया गया था, लेकिन आज यह खुद प्रशासन के लिए हंसी का पात्र बन गई है।”

“आपको याद होगा, जब पिछली बार यह घड़ी बंद हुई थी, तो शहर में काफी हंगामा हुआ था। तब महापौर ने ऐलान किया था कि जो कारीगर इसे ठीक करेगा, उसे इनाम दिया जाएगा। बड़े ताम-झाम के साथ कारीगर आया, घड़ी सुधरी और महापौर ने अपनी पीठ भी थपथपाई। लगा कि अब ‘अच्छे दिन’ आ गए हैं। लेकिन यह खुशी चार दिन की चांदनी साबित हुई। इनाम तो बंट गया, लेकिन घड़ी फिर से ‘कोमा’ में चली गई।”

“मकई चौक की यह बंद घड़ी सिर्फ समय नहीं, बल्कि सिस्टम की पोल खोल रही है। अब देखना होगा कि निगम प्रशासन अपनी इस ‘रुकी हुई’ साख को बचाने के लिए फिर से चाबी भरता है, या फिर यह घड़ी ऐसे ही मुंह चिढ़ाती रहेगी।सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इसे तोड़े जाने का पहला पड़ाव तो नही?क्यों कि लाखों खरोडो की स्वीकृति करने वाले निगम के सरपरस्त को क्या इसे केवल इनामो को जरिये ही ठीक करने का रास्ता दिखता है?क्या इसमें कोई बेहतर उपाय नही निकल् सकता?

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