भाजपा की मोदी सरकार 20 साल पुरानी इतिहासिक मनरेगा योजना को खतम करने की साजिश रच रही हैं यही कारण हमारे ग्रामीण इलाकों में रोजगार गारंटी नहीं खुल रहे है

धमतरीं/कांग्रेस विधायक ओंकार साहू ने केंद्र की मोदी भाजपा सरकार पर मनरेगा जैसी ऐतिहासिक जनकल्याणकारी योजना को समाप्त करने की साजिश रचने का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा के खात्मे के पीछे मोदी सरकार का एक ही मकसद है—गरीबों के रोज़गार के अधिकार को मिटाना, राज्यों से आर्थिक व राजनीतिक शक्ति छीनना और उस धन को अपने अरबपति मित्रों को सौंपना।
विधायक ओंकार साहू ने कहा कि मनरेगा कांग्रेस सरकार की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिसने ग्रामीण भारत को रोज़गार, सम्मान और आत्मनिर्भरता दी। लेकिन मोदी भाजपा सरकार सत्ता में आने के बाद से लगातार इस योजना को कमजोर करने में लगी हुई है। बजट में कटौती, मजदूरी भुगतान में देरी और राज्यों के अधिकारों में दखल देकर मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ‘एक अकेले प्रधानमंत्री’ की मनमानी नीतियों का नुकसान आज पूरा भारत भुगत रहा है। मोदी सरकार की नीतियों के कारण गांवों में रोज़गार खत्म हो रहे हैं, बेरोज़गारी बढ़ रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था टूटने की कगार पर है। मनरेगा कमजोर होगी तो गांवों से शहरों की ओर मजबूरी में पलायन बढ़ेगा, जिसका सीधा असर देश की सामाजिक और आर्थिक संरचना पर पड़ेगा।
ओंकार साहू ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब गांव कमजोर होंगे, तो देश कमजोर होगा। लेकिन मोदी सरकार को न गांवों की चिंता है, न गरीबों की। उनकी पूरी नीति कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने तक सीमित है, जबकि आम आदमी महंगाई, बेरोज़गारी और बदहाल अर्थव्यवस्था से जूझ रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी मोदी भाजपा सरकार की इस जनविरोधी सोच को कभी सफल नहीं होने देगी। मनरेगा को खत्म करने या कमजोर करने की किसी भी कोशिश का कांग्रेस सड़क से लेकर विधानसभा और संसद तक जोरदार विरोध करेगी।
अंत में विधायक ओंकार साहू ने केंद्र सरकार से मांग की कि मनरेगा का बजट तत्काल बढ़ाया जाए, मजदूरों को समय पर पूरा भुगतान किया जाए और राज्यों के अधिकारों में दखल देना बंद किया जाए। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल मनरेगा की नहीं, बल्कि गरीबों के सम्मान, रोज़गार और भारत के गांवों को बचाने की लड़ाई है।
